पंजाब में मीडिया पर दबाव लोकतंत्र के लिए घातक:- उत्तराखंड पत्रकार यूनियन

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उत्तराखंड समाचार 365/धनवीर कुंमाई

देहरादून- उत्तराखंड पत्रकार यूनियन ने पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र समूह पंजाब केसरी को कथित रूप से निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

उत्तराखंड पत्रकार यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष आशीष कुमार ध्यानी ने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया का सबसे बड़ा दायित्व सत्ता से सवाल पूछना है। सरकारों की आलोचना करना या जनहित से जुड़े मुद्दों को उजागर करना किसी भी मीडिया संस्थान का संवैधानिक अधिकार है। यदि किसी समाचार पत्र को उसकी निर्भीक पत्रकारिता की वजह से दबाव, जांच या प्रशासनिक कार्रवाइयों का सामना करना पड़ रहा है, तो यह प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।



प्रदेश अध्यक्ष ध्यानी ने आगे कहा कि पंजाब केसरी जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्र समूह को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जाना यह दर्शाता है कि असहमति और आलोचनात्मक आवाज़ों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। यह प्रवृत्ति न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है, बल्कि आम जनता के सूचना के अधिकार को भी कमजोर करती है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

इस संबंध में उत्तराखंड पत्रकार यूनियन के महासचिव हरीश जोशी ने कहा कि प्रशासनिक तंत्र का उपयोग कर मीडिया संस्थानों को डराने की नीति बेहद खतरनाक है। उन्होंने कहा कि यदि आज एक समाचार पत्र को निशाना बनाया जा रहा है, तो कल कोई भी स्वतंत्र पत्रकार सुरक्षित नहीं रहेगा।

उत्तराखंड पत्रकार यूनियन देश के किसी भी हिस्से में पत्रकारिता पर हो रहे हमलों के खिलाफ मजबूती से खड़ी रहेगी।

उत्तराखंड पत्रकार यूनियन ने स्पष्ट मांग की है कि पंजाब केसरी के विरुद्ध की जा रही सभी कथित दमनात्मक और पक्षपातपूर्ण कार्रवाइयों को तत्काल रोका जाए तथा पंजाब में स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के लिए अनुकूल वातावरण सुनिश्चित किया जाए।
यूनियन नेतृत्व ने दोहराया कि स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमला केवल किसी एक अख़बार का विषय नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा से जुड़ा प्रश्न है। सच की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता और न ही उसे दबने दिया जाएगा।

उत्तराखंड पत्रकार यूनियन ने इस संबंध में अपना विरोध पत्र ई-मेल के माध्यम से माननीय राज्यपाल, पंजाब को प्रेषित कर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

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