भाषा एआई ने मसूरी में क्षेत्रीय भाषाओं के डिजिटलीकरण के लिए किया जनसंवाद
उत्तराखंड समाचार 365/धनवीर कुंमाई
मसूरी, उत्तराखंड – 20 सितंबर 2026
उत्तराखंड की क्षेत्रीय भाषाओं को डिजिटल युग में नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से भाषा एआई की कोर लीडरशिप ने आज मसूरी में पिक्चर पैलेस के समीप प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सच्चिदानंद सेमवाल, अनिल गोदियाल और राजेंद्र सिंह रावत ने क्षेत्रीय बोलियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का रोडमैप साझा किया और इसके लिए जनभागीदारी का औपचारिक आह्वान किया।
टीम ने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी जैसी बोलियों के प्रामाणिक भाषाई डेटा को एकत्र कर स्थानीय एआई मॉडल को प्रशिक्षित करना है, ताकि इन भाषाओं का संरक्षण और वैश्विक मंचों पर विस्तार हो सके।
नागरिकों से की ये अपील –
भाषा एआई टीम ने मसूरी और आसपास के नागरिकों, लेखकों, साहित्यकारों और संस्कृति कर्मियों से निम्नलिखित सहयोग की अपील की है:
1. गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी किताबें और पांडुलिपियां 2. क्षेत्रीय शब्दकोश और शब्दों के अर्थ सहित शब्दावली 3. रोजमर्रा की बोलचाल के शब्द, वाक्य और बोलियों की बारीकियां 4. आवाज की टोन और उच्चारण की मैपिंग के लिए ऑडियो रिकॉर्डिंग
भाषा एआई का लक्ष्य इस जमीनी डेटा को स्पेशलाइज्ड वेक्टर एंबेडिंग और लोकल एलएलएम (LLM) पाइपलाइन में बदलकर भाषिणी (Bhashini), गूगल और चैटजीपीटी जैसे राष्ट्रीय और वैश्विक प्लेटफॉर्म से जोड़ना है। यह पहल प्रदेश के 1.5 करोड़ से अधिक नागरिकों के डिजिटल समावेशन को सुनिश्चित करेगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लीडरशिप ने कहा, “हम मसूरी में समाज से मिल रहे भारी समर्थन से बेहद उत्साहित हैं, जहां स्थानीय निवासी, लेखक और सांस्कृतिक पैरोकार बुनियादी ग्रंथ और महत्वपूर्ण भाषाई डेटा जुटाने में हमारी सक्रिय रूप से मदद कर रहे हैं।”
अनिल गोदियाल सांस्कृतिककर्मी द्वारा बताया गया कि उनके सहयोगी साथीयों द्वारा आज नगर पालिका अध्यक्षा मीरा सकलानी से इस विषय में वार्ता की गई और उन्हें अपार हर्ष हुआ कि पालिका अध्यक्षा का इस विषय में सकारात्मक रूप प्रस्तुत हुआ।
यह पहल उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल रूप में संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

