मसूरी में ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते चलन से स्थानीय बाजारों पर संकट, व्यापार संघ ने जताई चिंता
“वोकल फॉर लोकल को सोशल मीडिया से निकालकर जमीन पर उतारने की अपील”
उत्तराखंड समाचार 365/धनवीर कुंमाई
मसूरी-डिजिटल युग में ऑनलाइन खरीदारी की बढ़ती लत ने मसूरी के पारंपरिक और स्थानीय बाजारों की कमर तोड़ दी है। यह कहना है मसूरी व्यापार संघ के अध्यक्ष रजत अग्रवाल का।
व्यापार संघ अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने बताया कि बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा दिए जा रहे भारी डिस्काउंट, कैशबैक और आक्रामक मार्केटिंग के कारण आम उपभोक्ता धीरे-धीरे स्थानीय बाजारों से दूर होता जा रहा है। इसका सीधा और घातक असर हमारे पड़ोस के किराना स्टोर, कपड़ा व्यापारियों, इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानों और फुटकर विक्रेताओं पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय बाजार सिर्फ व्यापार के केंद्र नहीं हैं, बल्कि ये हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ और सामाजिक ताने-बाने का अहम हिस्सा हैं। जब एक उपभोक्ता स्थानीय दुकान से सामान खरीदता है, तो वह पैसा उसी शहर के आर्थिक चक्र में घूमता रहता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और रोजगार के अवसर बने रहते हैं।
अग्रवाल ने बताया कि ऑनलाइन शॉपिंग के कारण मुख्य रूप से दो बड़े नुकसान हो रहे हैं। पहला, छोटे व्यापारियों की आजीविका और उन पर निर्भर कर्मचारियों के रोजगार पर संकट मंडरा रहा है। दूसरा, बाजारों से त्योहारों और शादियों के सीजन वाली रौनक गायब हो गई है, जो कभी मसूरी की पहचान हुआ करती थी।
इस स्थिति को लेकर व्यापार संघ ने सरकार से मांग की है कि ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए सख्त नियम बनाए जाएं, जैसे डिस्काउंट की सीमा तय करना, पारदर्शी व्यापार नीति लागू करना और लोकल सेलर्स को प्राथमिकता देना।
साथ ही व्यापार संघ ने आम जनता से भी भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि “वोकल फॉर लोकल” का नारा केवल सोशल मीडिया की पोस्ट तक सीमित ना रहे। अपने पड़ोस के दुकानदार को बचाएं, क्योंकि संकट के समय, बीमारी में या किसी आपात स्थिति में वही आपके काम आता है, कोई ऑनलाइन ऐप नहीं।
अंत में उन्होंने कहा कि इस त्योहारी और शादियों के सीजन में सभी लोग अपने स्थानीय बाजारों में कदम बढ़ाएं और देश की जमीनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अपना योगदान दें।

