20 मई को प्रस्तावित एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी बंद की अग्रिम सूचना तथा मांगों को लेकर ज्ञापन दिया
उत्तराखंड समाचार 365/धनवीर कुंमाई
मसूरी-आल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) की राज्य इकाई मसूरी केमिस्ट्स एसोसिएशन की ओर से आज प्रदेश के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को उपजिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित किया गया। संगठन देशभर के 12.40 लाख से अधिक केमिस्ट्स एवं वितरकों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

केंद्र एवं राज्य स्तर पर विभिन्न प्राधिकरणों के समक्ष बार-बार निवेदन करने के बावजूद, औषधि व्यापार एवं जनस्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले गंभीर मुद्दे अब तक अनसुलझे हैं। यह स्थिति अब अत्यंत चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है, जिससे 12.40 लाख से अधिक केमिस्ट्स तथा लगभग 4 से 5 करोड़ आश्रितों की आजीविका पर संकट उत्पन्न हो गया है।
इस संबंध में सूचित करना हैं कि हमारी राष्ट्रीय संस्था AIOCD ने लंबे समय से लंबित मुद्दों के विरोध स्वरूप 20 मई 2026 को एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी दवा व्यापार बंद का आह्वान किया है:
1. अवैध ई-फार्मेसी संचालन एवं दिनांक 28.08.2018 की अधिसूचना GSR 817(E) की वापसी
2. बड़े कॉरपोरेट्स द्वारा शिकारी मूल्य निर्धारण (Predatory Pricing)
3. GSR 220(E) दिनांक 26.03.2020 अधिसूचना की वापसी
अवैध ई-फार्मेसियों की अनियंत्रित वृद्धि तथा बड़े कॉरपोरेट्स द्वारा प्रिडेटोरी मूल्य निर्धारण की प्रवृत्तियां स्थापित औषधि वितरण प्रणाली को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं। ये परिस्थितियां न केवल छोटे एवं मध्यम केमिस्ट्स के अस्तित्व के लिए खतरा हैं, बल्कि निम्न कारणों से जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर जोखिम उत्पन्न करती हैं:

• वैध चिकित्सकीय पर्चे के बिना दवाओं की बिक्री
• प्रिस्क्रिप्शन (पर्चों) का बार-बार दुरुपयोग
• एंटीबायोटिक्स एवं आदत (हैबिट फार्मिंग) बनाने वाली दवाओं की आसान उपलब्धता
• नकली अथवा सत्यापन योग्य न होने वाले प्रिस्क्रिप्शन (पर्चों) का प्रचलन
• फार्मासिस्ट एवं रोगी के बीच प्रत्यक्ष संवाद का अभाव
• विभिन्न न्यायिक क्षेत्रों में कमजोर नियामक नियंत्रण
• नकली एवं अनुचित भंडारण वाली दवाओं का जोखिम
• एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) का बढ़ता खतरा
आपको विदित ही है कि औषधि कोई सामान्य वस्तु नहीं है; यह सीधे रोगी की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। वर्तमान व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि योग्य चिकित्सक एवं पंजीकृत फार्मासिस्ट के माध्यम से सही दवा सही रोगी तक पहुंचे। इस व्यवस्था में किसी भी प्रकार की शिथिलता जनस्वास्थ्य पर गंभीर दुष्परिणाम डाल सकती है।
इसके अतिरिक्त, बड़े कॉरपोरेट्स द्वारा अत्यधिक छूट (Deep Discounting) के माध्यम से अपनाई जा रही प्रिडेटोरी मूल्य (शिकारी मूल्य) निर्धारण की नीतियां निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को विकृत कर रही हैं, जिससे छोटे केमिस्ट्स के लिए अस्तित्व बनाए रखना कठिन होता जा रहा है और बाजार का वातावरण अस्थिर एवं असंतुलित बन रहा है।

हम आपका ध्यान दिनांक 26.03.2020 की अधिसूचना G.S.R. 220(E) की ओर भी आकृष्ट करना चाहते हैं, जो कोविड-19 महामारी के दौरान आपातकालीन प्रावधानों के अंतर्गत जारी की गई थी। चूंकि महामारी की स्थिति अब काफी समय पहले समाप्त हो चुकी है, अतः इस अधिसूचना की निरंतर प्रभावशीलता का दुरुपयोग हो रहा है तथा ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स नियमों के अंतर्गत आवश्यक सुरक्षा प्रावधानों को दरकिनार किया जा रहा है।
हमारे लगातार प्रयासों एवं प्रस्तुतियों के बावजूद अब तक कोई प्रभावी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे पूरे व्यापार जगत में व्यापक असंतोष व्याप्त है। उपरोक्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए, हम आपके माननीय कार्यालय से विनम्र निवेदन करते हैं कि कृपया राज्य स्तर पर इस विषय में हस्तक्षेप कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की कृपा करें। भारत सरकार को निम्नलिखित हेतु सशक्त अनुशंसा प्रदान करने की कृपा करें:
• अधिसूचना G.S.R. 220(E) दिनांक 26.03.2020 की वापसी
• अधिसूचना G.S.R. 817(E) दिनांक 28.08.2018 की वापसी
• प्रिडेटोरी मूल्य निर्धारण पर रोक लगाने एवं निष्पक्ष व्यापार सुनिश्चित करने हेतु नीतियों का क्रियान्वयन
जनस्वास्थ्य की सुरक्षा तथा लाखों केमिस्ट्स की आजीविका के संरक्षण हेतु अपना समर्थन प्रदान करने की कृपा करें।
मनोज अग्रवाल द्वारा बताया गया कि हमें पूर्ण विश्वास है कि इन मुद्दों के सौहार्दपूर्ण एवं शीघ्र समाधान हेतु सरकार अपना सहयोग एवं सक्रिय हस्तक्षेप प्रदान करेंगे।
अपने पक्ष को व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत करने हेतु भेंट का अवसर प्रदान किए जाने के लिए भी आभारी रहें। इस मौके पर
मनोज अग्रवाल,विपुल मित्तल,नीरज सिंघल
डॉ.खान,सुमित आदि उपस्थित रहें

