आर्य समाज मसूरी के त्रिदिवसीय वार्षिकोत्सव का दूसरा दिन श्रद्धा व भक्ति के साथ सम्पन्न
उत्तराखंड समाचार 365/धनवीर कुंमाई
मसूरी–आर्य समाज मसूरी के त्रिदिवसीय वार्षिकोत्सव का दूसरा दिन वैदिक प्रवचनों और भजनों के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में वक्ताओं ने मानव जीवन में सद्गुणों को अपनाने और दुर्गुणों के त्याग पर बल दिया।

दूसरे दिन के मुख्य वक्ता आर्य उपदेशक डॉ. वीरेन्द्र शास्त्री ने कहा कि सुखी व्यक्ति के प्रति मित्रता, दुःखी व्यक्ति के प्रति करुणा, विद्वान, आचार्यों एवं धर्मात्मा लोगों के प्रति प्रसन्नता अर्थात मुदिता तथा दुष्ट एवं नीच व्यक्ति के प्रति उपेक्षा का भाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन चारों भावों को मन में धारण करने से ही मनुष्य ईश्वर प्राप्ति के मार्ग पर अग्रसर हो सकता है।

आर्य कन्या गुरुकुल देहरादून से पधारीं डॉ. अन्नपूर्णा ने अपने उद्बोधन में कहा कि उल्लू के समान मोह, भेड़िये के समान क्रोध, कुत्ते के समान ईर्ष्या, चिड़े के समान कामना, गरुड़ के समान अहंकार और गिद्ध के समान लोभ रखने वाला व्यक्ति कभी ईश्वर के मार्ग पर नहीं चल सकता। ईश्वर प्राप्ति के लिए इन सभी दुर्गुणों का पूर्णतः त्याग करना आवश्यक है।

इस अवसर पर प्रसिद्ध भजनोपदेशक श्री सुमित अंगिरस ने शास्त्रीय रागों पर आधारित मधुर भजनों की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम में दिल्ली, गंगोह, रामपुर मनिहारान, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम के अंत में आर्य समाज मसूरी के प्रधान श्री आनंद रस्तोगी ने सभी अतिथियों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. सरला प्रधान,अनुराग रस्तोगी,राजेश नांगिया, प्रणव साहनी,सतीश रोहिला सहित बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

