मसूरी-देहरादून NH पर पानी वाला बैंड पुश्ता ढहने पर बवाल, मुख्यमंत्री से नंदा की चौकी पुल की तरह उच्च स्तरीय जांच की मांग
उत्तराखंड समाचार 365/धनवीर कुंमाई
मसूरी, 12 अगस्त 2026
उत्तराखंड राज्य निर्माण सम्मान आंदोलनकारी प्रदीप भण्डारी ने मसूरी-देहरादून नेशनल हाईवे पर पानी वाला बैंड के पास धंसे पुश्ते के मामले में मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर नंदा की चौकी पुल प्रकरण की तरह उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। ज्ञापन आज उपजिलाधिकारी मसूरी के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार को प्रेषित किया गया।

ज्ञापन में क्या कहा गया –
प्रदीप भण्डारी ने ज्ञापन में बताया कि देहरादून-मसूरी नेशनल हाईवे पर पानी वाला बैंड नामक स्थान पर गत वर्ष 15-16 सितंबर की आपदा में मुख्य सड़क का पुश्ता टूट गया था। प्राप्त जानकारी के अनुसार क्षतिग्रस्त पुश्ते का लोक निर्माण विभाग द्वारा अक्टूबर-नवंबर माह में ठेकेदार के माध्यम से पुनर्निर्माण किया गया था। मगर पुश्ता मात्र 6 महीने में ही 20 जुलाई 2026 को भरभरा कर टूट गया जिससे नेशनल हाईवे बंद हो गया।

लगभग एक माह होने को है और तब से अब तक उक्त स्थल पर आवागमन बुरी तरह प्रभावित है। फिलहाल पहाड़ी काटकर वन-वे के रूप में जोखिम भरे तरीके से वाहनों का आवागमन कराया जा रहा है। तेज बारिश में पहाड़ी कभी भी दरक सकती है। दोनों तरफ कई किमी तक वाहनों की लंबी लाइनें लग रही हैं, जिससे देश-विदेश के पर्यटकों, स्थानीय नागरिकों और एंबुलेंस जैसी आवश्यक सेवाओं को भारी परेशानी हो रही है।

भण्डारी ने कहा कि मसूरी के लिए एकमात्र सुरक्षित यह मार्ग न सिर्फ प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल मसूरी का मुख्य मार्ग है, बल्कि चारधाम के प्रथम पड़ाव गंगोत्री-यमुनोत्री धाम का मार्ग भी है और देहरादून के अलावा उत्तरकाशी तथा टिहरी जिलों को भी जोड़ता है।
विभागीय लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप
ज्ञापन में कहा गया है कि मसूरी या प्रदेश भर में बन रहे पुल या पुश्तों के निर्माण में निरन्तर विभागीय लापरवाही, गुणवत्ता का अभाव, सक्षम ठेकेदार का अभाव, उचित देखरेख की कमी तथा उचित तकनीकी प्रणाली का अभाव मुख्य कारण है। इससे न सिर्फ सड़कें टूटती हैं व यातायात प्रभावित होता है बल्कि यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ होता है और राजकोष का लाखों-करोड़ों रुपया बर्बाद हो रहा है।
इन 5 बिंदुओं पर हो जांच – मांग
प्रदीप भण्डारी ने मांग की है कि दोषपूर्ण परिपाटी पर स्थायी रोक लगे और सभी दोषियों को सजा मिले। उन्होंने जांच इन 5 बिंदुओं पर केन्द्रित करने की मांग की है –
1. उक्त पुश्ते के किसी भी भाग के निर्माण या मरम्मत पर कुल कितना व्यय आया ?
2. किस मद में से उक्त क्षतिग्रस्त पुश्ते पर पैसा खर्च हुआ।
3. जिस ठेकेदार द्वारा उक्त पुश्ते का निर्माण किया गया था क्या उसका टेण्डर हुआ था और ठेकेदार के पास वर्क आर्डर था।
4. पुश्ते की मरम्मत हो जाने के बाद किस इंजीनियर ने पुश्ते की जांच कर पास किया था।
5. जब यह पुश्ता गत 15-16 की आपदा से या उससे पहले से भी खतरा बना हुआ था तो लोक निर्माण विभाग द्वारा पुश्ते की निगरानी एवं निर्माण समय रहते हुए क्यों नहीं किया गया। तथा पानी के निकासी की उचित व्यवस्था क्यों नहीं की गई। इसके लिए कौन जिम्मेदार है ?


